लाते नहीं नज़र में गुलतानी गुहर को — मीर तक़ी मीर
“The fragrant flower, the gul-e-tani, does not shed its glance; But I, who am devoted, let my own tears pour down.”
अर्थ
लाते नहीं नज़र में गुलतानी गुहर को, हम तो मुक़द्दिद हैं अपने आँसू ही की ढलक के। (अर्थात, जिस तरह एक सुंदर फूल अपनी नज़र नहीं झुकाता, उसी तरह मैं अपने आँसुओं को बहने देता हूँ।)
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ आँखों की बात नहीं करता, यह दिल की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि महबूब की आँखों में कोई रहस्य नहीं है, वे अपनी कहानी छुपाती हैं। लेकिन आशिक़़ का दर्द.... वह अपने आँसुओं की ललक से इतना वक़्त बिता चुका है कि अब उसे किसी और सहारे की ज़रूरत नहीं। यह एक गहरे, अकेले दर्द का बयान है।
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