कल इक मिज़ा निचोड़े तूफ़ान नूह आया — मीर तक़ी मीर

कल इक मिज़ा निचोड़े तूफ़ान नूह आया फ़िक्र-ए-फ़िशार में हूँ 'मीर' आज हर पलक के

“Tomorrow, you will pluck a mood; the Noah's flood has come. In the worry of pressure, O Meer, I am in every moment's eyelid.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

कल इक मिज़ा निचोड़े तूफ़ान नूह आया, फ़िक्र-ए-फ़िशार में हूँ 'मीर' आज हर पलक के। इसका अर्थ है कि कल एक मिज़ाज (मनोदशा) से नूह का तूफ़ान आ गया है, और 'मीर' आज हर पलक की फ़िक्र-ए-फ़िशार (दबाव/चिंता) में है।

विस्तार

यह शेर भावनात्मक उथल-पुथल और भारी दबाव की बात करता है। शायर कहते हैं कि महबूब के मन का बस एक मिज़ा बदलना भी, नूह के क़हर जैसे तूफ़ान ला सकता है। वह एक लगातार चिंता और तनाव (फ़िक्र-ए-फ़िशार) की स्थिति में हैं, जहाँ पलक झपकना भी एक बहुत बड़ा काम लगता है। यह अंदरूनी बेचैनी का एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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