ऐसी हस्ती अदम में दाख़िल है — मीर तक़ी मीर
“Such a being enters the self-controlled state, Neither a new youth nor a cub of a lion has become.”
अर्थ
ऐसी हस्ती अदम में दाख़िल है, नय जवाँ हम न तिफ़्ल-ए-शीर हुए। इसका शाब्दिक अर्थ है कि ऐसा कौन सा अस्तित्व है जो संयम की स्थिति में प्रवेश कर गया है, जो न तो एक नया युवा है और न ही शेर का बच्चा।
विस्तार
यह शेर जीवन के उस मोड़ को दर्शाता है जब इंसान एक अनजाने और बड़े शून्य में कदम रख रहा होता है। शायर कह रहे हैं कि हम न तो पूरी तरह जवान हैं और न ही किसी शेर के बच्चे... हम एक ऐसी हस्ती हैं जो अभी खुद को खोज रही है। यह उस नाजुक, बीच के दौर का एहसास है, जहां न ताकत है, न पूर्णता।
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