अपने रोते ही रोते सहरा के — मीर तक़ी मीर

अपने रोते ही रोते सहरा के गोशे गोशे में आब-गीर हुए

“As if weeping, the desert's every corner”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अपने रोते ही रोते सहरा के गोशे गोशे में आब-गीर हुए। (अर्थ: ऐसा प्रतीत होता है मानो रेगिस्तान के हर कोने में आँसू की नदियाँ बह निकली हों।)

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही ख़ूबसूरत तसव्वुर पेश करता है। शायर कह रहे हैं कि रोने से जो ग़म होता है न, वो सिर्फ़ आँखों में नहीं रहता। वो इस क़दर फैल जाता है कि रेगिस्तान के हर कोने में नमी आ जाती है। मतलब, ग़म सिर्फ़ दिल तक सीमित नहीं होता, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी उदासी से भिगो देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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