जिन की ख़ातिर की उस्तुख़्वाँ-शिकनी — मीर तक़ी मीर
जिन की ख़ातिर की उस्तुख़्वाँ-शिकनी
सो हम उन के निशान-ए-तीर हुए
“For those whose sake we wore the humble attire, We became merely the marks of the arrow.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिनकी खातिर हमने जो विनम्र वेश धारण किया, वे हम उनके तीर के सिर्फ निशान बन गए।
विस्तार
यह शेर उस गहरे इश्क़ की बात करता है, जिसमें दर्द भी एक निशानी बन जाता है। शायर कहते हैं कि जो ज़ख्म, जो चोटें आपने किसी के लिए सही हैं.... वो सिर्फ घाव नहीं हैं। वो तो उस महबूब के तीर के निशान बन गए हैं। मतलब, आपका दर्द इतना सच्चा है कि वो हमेशा के लिए आपकी मोहब्बत की गवाही बन गया है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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