पामाली-ए-आशिक़ को मंज़ूर रखे जाना — मीर तक़ी मीर
“To let the lover's wanderings remain acceptable, One must also walk with care, lest stumbling be found.”
अर्थ
आशिक़ की मनमानी को स्वीकार्य बनाए रखना है, तो चाल-चलन में भी सावधानी बरतनी होगी, कहीं ठोकर न खा लें।
विस्तार
यह शेर इश्क की उस उलझन को दिखाता है, जहाँ दिल पूरी तरह से बेकाबू होता है, लेकिन पैर नहीं। शायर कहते हैं कि आशिक़ का पागलपन, उसकी माशूक़ की राहों में भटकना... ये सब स्वीकार कर लो। लेकिन, ज़रा सा भी कदम उठाते समय, ठोकर न लगे! यह एक बहुत ही गहरा विरोधाभास है। दिल में तूफ़ान हो, मगर ज़मीन पर पैर जमाए रखना ज़रूरी है।
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