किस शक्ल से अहवाल कहूँ अब मैं इलाही — मीर तक़ी मीर

किस शक्ल से अहवाल कहूँ अब मैं इलाही सूरत से मिरी जिस में वो बेज़ार न होवे

“From what countenance shall I now speak of my state, O God, That from my face, they may not be weary.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं ईश्वर से यह कैसे कहूँ कि मेरी किस सूरत से मेरी हालत का वर्णन करूँ, जिससे वे लोग मुझसे ऊब न जाएँ।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के दिल का सबसे गहरा दर्द बयां करता है। शायर कहते हैं कि वे अपनी हालत को किसी भी तरह से बयान नहीं कर सकते.... क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका वजूद, उनकी सूरत, किसी को कभी भी खुश नहीं रख पाएगा। यह एक बहुत ही बड़ी तन्हाई है—जब आपको अपने ही अस्तित्व पर संदेह होने लगे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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