पज़मुर्दा बहुत है गुल-ए-गुलज़ार हमारा — मीर तक़ी मीर

पज़मुर्दा बहुत है गुल-ए-गुलज़ार हमारा शर्मिंदा-ए-यक-गोशा-ए-दस्तार न होवे

“Our garden of flowers has many a fallen bloom, May you not be ashamed of a corner of your scarf.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हमारे फूलों के बगीचे में बहुत से मुरझाए फूल हैं, और मैं चाहता हूँ कि आप अपने दुपट्टे के एक कोने पर कभी शर्मिंदा न हों।

विस्तार

यह शेर गहरे विषाद और इज़्ज़त के बोझ को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि उनका गुलज़ार (उनकी ज़िंदगी) बहुत सारे पज़मुर्दों से भरा है, जो नुकसान और निराशा का प्रतीक है। लेकिन सबसे बड़ा डर यह है कि उनके दस्तार (सम्मान) का एक कोना भी शर्मिंदा न हो जाए। यह निराशा की एक बहुत ही गहरी भावना है, जहाँ ग़म ने उनके अस्तित्व के हर पहलू को दागदार कर दिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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