उस वास्ते काँपूँ हूँ कि है आह निपट सर्द — मीर तक़ी मीर
उस वास्ते काँपूँ हूँ कि है आह निपट सर्द
ये बाव कलेजे के कहीं पार न होवे
“Because of this, I tremble, for the sigh is so cold, These wild hearts can never cross its way.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
इस वजह से मैं काँप रहा हूँ, क्योंकि आह बहुत ठंडी है। ये पागल दिल कभी इसके पार नहीं हो सकते।
विस्तार
यह शेर दिल की गहरी उलझन और भावनात्मक बेचैनी को बयां करता है। शायर कहते हैं कि उनका कांपना किसी बाहरी ठंड के कारण नहीं है, बल्कि दिल की उस बेचैनी के कारण है जो निपट सर्द है। यह बावला कलेजा कहीं भी सुकून नहीं पा सकता। यह उस एहसास का डर है, जो इंसान को अंदर से जमा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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