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तुझ बिन दिमाग़ सोहबत-ए-अहल-ए-चमन था गुल वा हुए हज़ार वले हम वा हुए

Without you, the company of the garden's people was empty, Though a thousand roses bloomed, I did not bloom.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम्हारे बिना, बाग़ के लोगों की संगत सूनी थी, और हालाँकि हज़ार फूल खिले, मैं नहीं खिला।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के दिल का हाल बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि जब तक महबूब साथ नहीं है, तब तक बाग़ के लोगों की महफ़िल भी बेजान है। उन्होंने दुनिया की हर सुंदरता का ज़िक्र किया—हज़ार गुलाब खिले... लेकिन इन सब के बावजूद, न वो खिल पाए और न हम। यह इल्ज़ाम है कि ज़िंदगी की असली रौनक तो बस एक शख़्स की मौजूदगी में है।

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