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देखी एक चश्मक-ए-गुल भी चमन में आह हम आख़िर बहार-ए-क़फ़स से रहा हुए

Not even a single spectacle of a flower was seen in the garden, Yet we are departing from the spring of the cage.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

चमन में एक फूल का दृश्य भी नहीं दिखा, फिर भी हम पिंजरे की बहार से जा रहे हैं।

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही गहरी तन्हाई और दर्द को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि मैंने तो महफ़िल के बगीचे में एक फूल की झलक भी नहीं देखी, लेकिन मेरा वजूद तो क़ैदखाने की बसंत से गुज़र चुका है। इसका मतलब है कि दिल का दर्द, बाहर की सारी खूबसूरती से कहीं ज़्यादा गहरा और असली होता है। यह दर्द ही इंसान को ज़िंदा रखता है।

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