नाज़ुकी को 'इश्क़ में क्या दख़्ल है ऐ बुल-हवस — मीर तक़ी मीर

नाज़ुकी को 'इश्क़ में क्या दख़्ल है ऐ बुल-हवस याँ स'ऊबत खींचने को जी में ताक़त चाहिए

“To pull the desires (or urges) is an endeavor that requires strength in the heart.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नाज़ुकी को 'इश्क़ में क्या दख़ल है ऐ बुल-हवस, यारों स'ऊबत खींचने को जी में ताक़त चाहिए। शायर कह रहा है कि प्रेम में नाज़ुकी का क्या काम, ऐ बुलाने वाली वासना, दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए मन में ताकत चाहिए।

विस्तार

यह शेर प्रेम और वासना के गहरे रिश्ते को समझाता है। शायर पूछते हैं कि क्या नज़ाकत का इश्क़ में कोई दख़ल है, जब दिल में बस एक बेचैनी है? मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि प्यार की राह में सुंदरता से ज़्यादा ज़रूरी है हिम्मत। जो रिश्ता निभाना है, जो साथ बनाए रखना है, उसके लिए दिल में ताक़त चाहिए। यह बस एक एहसास नहीं, एक ज़िम्मेदारी है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.