जैसे जरस पारा गुलो क्या करूँ
नाला-ओ-अफ़्ग़ाँ में असर चाहिए
“As if the Ganges is merely a stream, what can I do? I need the influence of the Kabul River (Afaghan).”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जैसे गंगा की धारा मात्र एक नाला है, तो मैं क्या करूँ? मुझे नाला-ए-अफगान जैसा प्रभाव चाहिए।
विस्तार
यह शेर एक गहरे संघर्ष और महत्वाकांक्षा को बयां करता है। शायर कहते हैं, 'मैं जरस पारा के फूलों जैसा कैसे बनूँ?' लेकिन तुरंत ही यह स्पष्ट कर देते हैं कि उन्हें नला-ओ-अफ़ग़ाँ में असर चाहिए। इसका मतलब है कि केवल बाहरी सुंदरता या कोमलता काफी नहीं है। जीवन में असली पहचान और प्रभाव पाने के लिए, एक मजबूत और चुनौतीपूर्ण ज़मीन पर पैर रखना ज़रूरी है।
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