ख़ौफ़ क़यामत का यही है कि 'मीर'
हम को जिया बार-ए-दिगर चाहिए
“The fear of the Day of Judgment is this, that 'Mir', We crave a life different from this one.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
यह भय क़यामत का यही है कि 'मीर', हमें एक अलग जीवन चाहिए।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ मौत के डर की बात नहीं करता, बल्कि एक गहरे, रूहानी एहसास की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि क़यामत का सबसे बड़ा ख़ौफ़ यह है कि उन्होंने ज़िंदगी को पूरी तरह जिया ही नहीं। उनका डर किसी सज़ा का नहीं, बल्कि एक अधूरापन महसूस करने का है। यह एक बेचैनी है... एक ऐसी तड़प कि काश... उन्हें ज़िंदगी का कोई दूसरा रंग, कोई दूसरा अनुभव मिल जाता।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev9 / 9
