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सैंकड़ों मरते हैं सदा फिर भी याँ वाक़ि' इक शाम-ओ-सहर चाहिए

Hundreds perish always, yet we desire just one evening and one morning.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

सैकड़ों मरते हैं सदा फिर भी याँ, वाक़ि'आ इक शाम-ओ-सहर चाहिए। इसका शाब्दिक अर्थ है कि सैकड़ों लोग हमेशा मरते रहते हैं, फिर भी हमें बस एक शाम और एक सुबह चाहिए।

विस्तार

यह शेर दिल की तन्हाई और थकावट को बयां करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में न जाने कितने गम और मौतें होती रहती हैं.... लेकिन इन तमाम तबाही के बीच, इंसान को सिर्फ एक 'शाम और सुबह' चाहिए। यह एक सुकून की तलाश है, एक ठहराव की ज़रूरत है जो हमें इस भागमभाग भरी दुनिया में मिल जाए।

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