हस्ती में हम ने आ कर आसूदगी न देखी — मीर तक़ी मीर

हस्ती में हम ने आ कर आसूदगी न देखी खुलतीं न काश आँखें ख़्वाब ख़ुश अदम से

“In the presence of a wanderer, I did not see peace, / My eyes, which could not open, dreamt of bliss.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

किसी यात्री के सामने आकर मैंने शांति नहीं देखी, / मेरी आँखें, जो खुल नहीं सकीं, वे खुशी के सपने देखती रहीं।

विस्तार

यह शेर जीवन की सच्चाई और ख्वाबों की दुनिया के बीच के अंतर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि इस दुनिया में उन्हें कभी भी सुकून नहीं मिला। इसलिए, वह अपनी आँखें खुली नहीं रखना चाहते, बल्कि इसी खुशनुमा ख्वाब में खोए रहना पसंद करते हैं। यह एक गहरा अहसास है कि कभी-कभी, सच से बेहतर एक मीठा सा धोखा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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