क्या क्या तअब उठाए क्या क्या अज़ाब देखे — मीर तक़ी मीर
क्या क्या तअब उठाए क्या क्या अज़ाब देखे
तब दिल हुआ है उतना ख़ूगर तिरे सितम से
“What hardships have you endured, what torments have you witnessed, To make a heart so accustomed to your cruelty.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुमने कितने कष्ट उठाए और कितने अज़ाब देखे, इतने से दिल भी उतना साहसी हो गया तुम्हारे अत्याचार से।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की रूहानी गहराई को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि जब इंसान बहुत सारे तबाव, बहुत सारे अज़ाब झेल लेता है, तो दिल का क्या हाल होता है। वो टूटता नहीं, बल्कि एक अजीब सी आदत डाल लेता है। यह दर्द के साथ जीने की कला है, एक गहरी तन्हाई का इज़हार है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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