ताअ'त का वक़्त गुज़रा मस्ती में आब रज़ की — मीर तक़ी मीर

ताअ'त का वक़्त गुज़रा मस्ती में आब रज़ की अब चश्म-दाश्त उस के याँ है फ़क़त करम से

“The time of 'Ta'at' passed in intoxication of the beloved's grace; Now only the memories of that grace remain in the eyes.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ताअ'त का समय मस्ती में आब-ए-रज़ की तरह गुज़र गया; अब केवल उसकी यादें और कृपा ही आँखों में बाकी हैं।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस मीठे लेकिन मुश्किल मोड़ को बयान करता है। शायर कहते हैं कि अब वो वक़्त नहीं रहा जब सब कुछ सादे नियमों पर चल सके। अब तो ज़िंदगी मस्ती और राज़-ए-दिल में गुज़री है। और अब... बस महबूब की यादें ही सहारा हैं, और वो भी महबूब की मेहरबानी से!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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