सोज़िश गई न दिल की रोने से रोज़-ओ-शब के — मीर तक़ी मीर
सोज़िश गई न दिल की रोने से रोज़-ओ-शब के
जलता हूँ और दरिया बहते हैं चश्म-ए-नम से
“My heart, from weeping, has been scorched through days and nights, And rivers flow from my tear-filled eyes.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरा दिल रोने से दिनों और रातों में जल गया है, और मेरे नम आँखों से नदियाँ बह रही हैं।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरी तन्हाई और दर्द को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि दिल का जो दर्द है, वह रात-दिन रोने से कम नहीं हो रहा। बल्कि, दर्द इतना गहरा है कि अब आँसू नदियों की तरह बह रहे हैं। यह उस विरह की हद है, जहाँ रोना भी राहत नहीं देता, बस दर्द को और बढ़ा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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