सूरत-गर-ए-अजल का क्या हाथ था कहे तो — मीर तक़ी मीर

सूरत-गर-ए-अजल का क्या हाथ था कहे तो खींची वो तेग़-ए-अबरू फ़ौलाद के क़लम से

“What power did the head of Surat-gar-e-Azal possess? If I were to speak, she drew the sword of the eyebrow with a pen of steel.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

सूरत-गर-ए-अजल के हाथ में क्या ताकत थी, यह कहने की बात ही नहीं। उसने तो अपनी भौंह की तलवार को स्टील के कलम से खींच लिया था।

विस्तार

यह शेर सुंदरता की उस खतरनाक शक्ति को बयां करता है, जो बस एक नज़र में समाई होती है। शायर कहते हैं कि इस हसीन चेहरा की जो नज़ाकत है, वो इतनी ज़बरदस्त है कि उन्होंने अपनी भौंह (abroo) को तलवार बना दिया! और यह सब उन्होंने सिर्फ़ एक क़लम से किया। इसका मतलब है कि महबूब की एक अदा, एक नज़ाकत, एक इशारा... वो इतना क़ुदरती हथियार है!

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