कब से नज़र लगी थी दरवाज़ा-ए-हरम से — मीर तक़ी मीर
कब से नज़र लगी थी दरवाज़ा-ए-हरम से
पर्दा उठा तो लड़ियाँ आँखें हमारी हम से
“Since when was the gaze fixed from the door of the sanctuary, When the curtain lifted, our eyes were confronted with you.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर पूछ रहा है कि कब से नज़र दरवाज़ा-ए-हरम से लगी थी, और जब पर्दा उठा तो लड़ियाँ आँखें हमारी हम से।
विस्तार
यह शेर नज़रों की ताक़त और इंतज़ार के एहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि कब से उनकी आँखें महबूब की एक झलक पाने को बेचैन थीं। जब आख़िरकार वो पर्दा उठा, तो महबूब की नज़रों का जादू इतना गहरा था कि शायर खुद को उसमें खो गए! क्या कमाल की बात है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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