करूँ क्या हसरत-ए-गुल को वगर्ना — मीर तक़ी मीर
“What should I do regarding the yearning for roses, if not, For my own heart is a garden bearing stains.”
अर्थ
शायर पूछ रहा है कि गुलाब की लालसा (हसरत) को लेकर उसे क्या करना चाहिए, क्योंकि उसका अपना दिल ही एक ऐसा बाग है जिस पर दाग़ लगे हुए हैं।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी बात कहता है, कि कभी-कभी दिल के दाग़ ही हमारी पहचान बन जाते हैं। शायर पूछ रहे हैं, कि गुलाब की खुशबू की चाहत क्यों करूँ? क्योंकि मेरा अपना आँगन (दिल) पहले से ही दाग़दार है। इसका मतलब है कि जो दर्द और यादें हमने जी ली हैं, वे इतनी गहरी हैं कि अब किसी नई खुशी या चाहत में भी वो दाग़ झलकते हैं। यह दिल के घावों को स्वीकार करने का नज़ारा है।
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