टपकते दर्द हैं आँसू की जागा — मीर तक़ी मीर
टपकते दर्द हैं आँसू की जागा
इलाही चश्म या ज़ख़्म-ए-कुहन है
“These dripping pains are the tears' dwelling place, Or are they the wounds of old, oh divine grace?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आँसू की जगह से टपकते दर्द हैं, या ये पुराने ज़ख्म हैं, हे इलाही?
विस्तार
यह शेर दर्द और ग़म के गहरे रिश्ते को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं कि ये आँसू कहाँ से टपक रहे हैं—क्या ये किसी दैवीय स्रोत से हैं, या ये किसी पुराने, गहरे ज़ख्म का सैलाब है? शायर यह इशारा कर रहे हैं कि कभी-कभी हमारा ग़म किसी बाहरी घटना का नतीजा नहीं होता, बल्कि अंदर ही अंदर जमा एक पुराना दर्द होता है जो बाहर आ निकलता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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