घिरे हैं दर्द-ओ-अलम में फ़िराक़ के ऐसे
कि सुब्ह-ए-ईद भी याँ शाम है महरम की
“Enveloped in the pain and suffering of separation, so deep, That even the morning of Eid feels like the evening of a secluded beloved.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
फ़िराक़ के दर्द और गम में ऐसे डूबे हुए हैं कि ईद की सुबह भी महबूब की शाम जैसी लगती है।
विस्तार
यह शेर दिल के गहरे दर्द को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि फ़िराक़ का दर्द इतना गहरा है कि ईद की सुबह की ख़ुशी भी महरम की शाम के गम में गुम हो जाती है। यह दर्द ऐसा है जो ज़िंदगी के हर पल को एक ही उदासी में रंग देता है।
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