उस ज़ुल्म पेशा की ये रस्म-ए-क़दीम है गी — मीर तक़ी मीर

उस ज़ुल्म पेशा की ये रस्म-ए-क़दीम है गी ग़ैरों पे मेहरबानी यारों से कीना-जूई

“This custom of your cruel profession is old, To show kindness to strangers, and to friends, to be sold.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर कहता है कि आपके इस क्रूर पेशे की यह पुरानी रस्म है, कि परदेसियों पर मेहरबानी करना और दोस्तों को भी बेचना।

विस्तार

यह शेर इंसानी रिश्तों के कड़वे सच को बयां करता है। शायर कहते हैं कि अपनों को धोखा देने या ग़ैरों पर मेहरबानी दिखाना, यह एक तरह की आदत बन गई है। लेकिन सबसे बड़ा ज़ख्म कहाँ लगता है? वह ज़ख्म उन दोस्तों से मिलता है, जो हमेशा आपके साथ होने चाहिए। यह सिर्फ़ वफ़ादारी पर एक गहरा सवाल है।

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