बुलबुल की बेकली ने शब बे-दिमाग़ रखा — मीर तक़ी मीर
बुलबुल की बेकली ने शब बे-दिमाग़ रखा
सोने दिया न हम को ज़ालिम न आप सोई
“The nightingale's coquetry kept the night awake, Not even you, cruel one, could find sleep.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बुलबुल की चहक-चहक ने रात को बेताब रखा, और न आप, ज़ालिम, सो पाए।
विस्तार
बुलबुल की बेकली ने पूरी रात जाग्रत रखा, इसलिए ज़ालिम न आप भी सो नहीं पाए। यह शेर मिर् तक़ी मीर के इश्क़ की तड़प को दर्शाता है, जहाँ महबूब की बेवफ़ाई और यादों का असर ऐसा होता है कि नींद का सुख नसीब नहीं होता। मिर् तक़ी मीर यहाँ महबूब के वियोग में अपनी बेचैनी और प्रेम की तीव्रता को व्यक्त करते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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