तुझे क्यूँके ढूँडूँ कि सोते ही गुज़री — मीर तक़ी मीर

तुझे क्यूँके ढूँडूँ कि सोते ही गुज़री तिरी राह में अपने पिए तलब की

“Why should I search for you, when you passed by in my sleep, My beloved's path held a craving for you.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मुझे तुम्हें क्यों ढूंढना, जब तुम मेरी नींद में गुज़र गई, मेरे प्रिय की राह में एक चाहत बनकर।

विस्तार

यह शेर बताता है कि मोहब्बत का एहसास कितना सहज और गहरा होता है। शायर कहते हैं कि आपको उसे ढूँढने की ज़रूरत ही नहीं, क्योंकि उसकी यादें या उसकी मौजूदगी तो सोते हुए भी आपके पास गुज़र गई। मतलब, इश्क़ कोई कोशिश नहीं है, बल्कि एक ऐसी हकीकत है जो हर पल आपके साथ बसी रहती है। यह एहसास ही सबसे बड़ी इबादत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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