यकायक भी आ सर पे वामाँदगाँ के — मीर तक़ी मीर
यकायक भी आ सर पे वामाँदगाँ के
बहुत देखते हैं तिरी राह कब की
“Suddenly, on my head, the stray strands of hair, How long have I watched your path, when?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अचानक से, सिर पर बिखरे हुए बालों की तरह, मैंने तुम्हारी राह को कब से देखा है?
विस्तार
यह शेर उस गहरे और अटूट इंतज़ार को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब का आना अचानक, जैसे मोरपंखों का खिलना, होता है। लेकिन इस अचानक आने के बावजूद, हमारा इंतज़ार... वह बहुत लंबा है। यह शेर उस बेचैनी और उम्मीद को दर्शाता है जो किसी प्रियजन की राह तकते-तकते दिल में बस जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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