तू शमला जो रखता है ख़र है वगर्ना — मीर तक़ी मीर

तू शमला जो रखता है ख़र है वगर्ना ज़रूरत है क्या शैख़ दम इक वजब की

“If the one who keeps the garland is worthless, then what need is there of a single moment, Sheikh?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर जो माला रखता है वह बेकार है, तो शायख़, एक वज़्न की क्या ज़रूरत है।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा फ़लसफ़ा बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि अगर जो चीज़ हम संभालकर रख रहे हैं, उसका कोई सच्चा या ठोस वजूद ही नहीं है, तो फिर इस ज़माने में, इस जीवन में जीने का क्या मतलब है? क्या सिर्फ़ एक वजह के लिए इतना संघर्ष करना ज़रूरी है? यह हमें अपने मकसद पर सवाल उठाने को कहता है।

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