शाम शब-ए-विसाल हुई याँ कि इस तरफ़ होने लगा तुलूअ' ही ख़ुर्शीद रू-सियाह

“Has the evening become the night of union, or is the sun starting to shine in the west?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

क्या शाम मिलन की रात बन गई है, या सूरज पश्चिम में चमकना शुरू कर रहा है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ समय का सवाल नहीं है, बल्कि दिल की उलझन का आईना है। शायर पूछ रहे हैं कि यह शाम है, या विसाल की रात? और क्या सूरज निकल रहा है, या डूब रहा है? इसका जवाब हमें आसमान में नहीं, बल्कि अपनी रूह में खोजना होगा। जब इश्क़ अपनी चरम सीमा पर होता है, तो समय, दिन और रात का भेद मिट जाता है। यह शेर उस बेचैनी और भ्रम को बयां करता है, जब हम अपने महबूब की यादों में खो जाते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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