हनूज़ लड़के हो तुम क़द्र मेरी क्या जानो — मीर तक़ी मीर

हनूज़ लड़के हो तुम क़द्र मेरी क्या जानो शु'ऊर चाहिए है इम्तियाज़ करने को

“You are still a boy, how can you know my worth, You need a sense to test it and explore it.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तुम अभी लड़के हो, तुम मेरी क़द्र कैसे जानोगे। मुझे इस क़द्र को समझने के लिए एहसास चाहिए।

विस्तार

यह शेर, मिर्ज़ा तक़ी मीर का है, जो मोहब्बत और आत्म-जागरूकता की गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं, 'तुम अभी लड़के हो, मेरी क़द्र क्या जानोगे?' और फिर कहते हैं, 'इम्तियाज़ करने के लिए शऊर चाहिए।' यह एक बहुत ही नाज़ुक चुनौती है, जो यह दर्शाती है कि महबूब की नादानी के कारण वह शायर की भावनाओं की गहराई को नहीं समझ पाता। यह एक अधूरा प्यार का एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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