अगरचे गुल भी नुमूद उस के रंग करता है — मीर तक़ी मीर
अगरचे गुल भी नुमूद उस के रंग करता है
व-लेक चाहिए है मुँह भी नाज़ करने को
“Even if the rose shows its color, I still desire a face to adorn.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर गुलाब भी उसका रंग दिखाता है, पर मुझे एक चेहरा चाहिए जो सजाने के काम आए।
विस्तार
यह शेर न सिर्फ़ इश्क़ है, बल्कि एक शायर का अपना नशा है! मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि मान लीजिए कि कायनात के सारे फूल भी महबूब के रंग में रंग गए... लेकिन मेरे पास एक मुँह होना चाहिए नाज़ करने के लिए। यह कहना एक तरह का चैलेंज है, एक ख़ुद का इक़रार है कि मेरी अपनी ज़बान, मेरा अपना नशा है, जिसे किसी की तारीफ़ से कम नहीं होने देना चाहता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
