वो गर्म नाज़ हो तो ख़ल्क़ पर तरह्हुम कर — मीर तक़ी मीर
“If it is a warm grace, then be kind to the people, Call out, for they are ready to protest.”
अर्थ
अगर यह एक गर्म नज़ाकत है, तो लोगों पर मेहरबान बनो, क्योंकि वे विरोध करने के लिए पुकार रहे हैं।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब यहाँ एक चुनौती देते हैं। ये शेर महबूब के नज़ाकत भरे अंदाज़ की बेमिसाल ताक़त को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि अगर आपका नाज़ इतना गर्म और असरदार है, तो इसे छुपाओ मत। इसे दुनिया के सामने लाओ, और दुनिया को भी चुनौती दो कि वे इसके खिलाफ आवाज़ उठाएँ। यह इश्क़ की उस ताक़त पर बात है जो किसी को भी रोक नहीं पाती।
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