ज़ियादा हद से थी ताबूत-ए-'मीर' पर कसरत — मीर तक़ी मीर
ज़ियादा हद से थी ताबूत-ए-'मीर' पर कसरत
हुआ न वक़्त मुसाइद नमाज़ करने को
“The coffin of 'Mir' was beyond measure, in its extravagance; / Nor was the time opportune to perform the prayer.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीर के ताबूत पर हद से ज़्यादा खर्च हुआ, और न ही वक़्त मुसाइद नमाज़ करने को मिला।
विस्तार
यह शेर एक ज़बरदस्त आत्म-व्यंग्य है! शायर कहते हैं कि उनकी तख़्त-ए-कब्र (ताबूत) पर इतनी भीड़ थी... कि नमाज़ अदा करने का वक़्त ही नहीं मिला। यह सिर्फ़ एक मज़ाक नहीं है, बल्कि एक गहरी बात है। शायर अपनी शायरी की लोकप्रियता का आलम बता रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मौजूदगी इतनी ज़्यादा थी कि रस्मों को भी वक़्त नहीं मिला।
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