हर-दम की ताज़ा मर्ग-ए-जुदाई से तंग हूँ — मीर तक़ी मीर
“I am tired of the constant, fresh agony of separation; why can't what I desire simply happen just once?”
अर्थ
मैं हर पल के ताज़े बिछड़ने के दर्द से तंग आ चुका हूँ; जो कुछ पाना है, वह बस एक बार क्यों नहीं हो जाता।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ जुदाई का दर्द नहीं है, बल्कि उस दर्द से होने वाली थकावट है। शायर कहते हैं कि बार-बार का दर्द, जो ताज़ा होता रहता है, अब सहा नहीं जाता। दिल को एक स्थायी सुकून चाहिए.... वह एक बार का फैसला, एक बार की मंज़िल चाहिए। यह वो बेचैनी है जब इंसान ज़िंदगी के अनिश्चित चक्रों से थक जाता है और बस एक निर्णायक ठहराव चाहता है।
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