मुस्तग़नियाना तो जो करे पहले ही सुलूक
'आशिक़ को फ़िक्र-ए-आक़िबत-कार क्यूँ न हो
“If the one who is self-sufficient performs the devotion beforehand, Why should the lover not worry about the ultimate outcome?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर कोई व्यक्ति पहले ही स्वयं को आत्मनिर्भरता की अवस्था में पहुंचा दे, तो प्रेमी को अंतिम परिणाम की चिंता क्यों नहीं होनी चाहिए।
विस्तार
यह शेर रिश्तों की सच्चाई और आत्म-सम्मान की बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति आपको 'मुस्तग़नियाना' (बिना किसी कारण) छोड़ना या साथ छोड़ना चाहता है, तो आशिक़ को भविष्य की चिंता क्यों नहीं होनी चाहिए? यह एक गहरा संदेश है कि प्यार में अपनी कीमत समझना कितना ज़रूरी है। अगर महबूब आपको महत्व नहीं देता, तो टूटे दिल को टूटने का डर क्यों नहीं होना चाहिए।
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