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'आलम तमाम उस का गिरफ़्तार क्यूँ हो वो नाज़-पेशा एक है 'अय्यार क्यूँ हो

Why not be captured by the whole world's domain, That singular, magnificent being, O Ayyar, why not be?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

पूरे आलम का गिरफ़्तार वह एक नाज़-पेशा है, ऐय्यार, वह क्यों न हो।

विस्तार

यह शेर महबूब के नज़ाकत और अदा पर एक तरह का इकरार है। शायर कह रहे हैं कि वो इतना हसीन है कि.... पूरी दुनिया का मालिक भी उसके क़रार में बंध जाए! उसकी जो नज़ाकत है, वो किसी आम चीज़ से नहीं है। ये सिर्फ़ तारीफ़ नहीं है, बल्कि एक इश्क़ की इबादत है, जो महबूब को बेमिसाल बता रही है।

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पाठ
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