हर ख़राश-ए-जबीं जराहत है — मीर तक़ी मीर
हर ख़राश-ए-जबीं जराहत है
नाख़ुन-ए-शौक़ का हुनर देखो
“Every scratch upon the forehead is an injury; / Behold the artistry of the nails of desire.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हर माथे पर खरोंच एक घाव है; / चाहत की उँगलियों का हुनर देखो।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने इश्क़ की उस बारीक, न दिखने वाली तकलीफ को बयां किया है। शायर कहते हैं कि गाल पर लगी हर छोटी-सी खरोंच भी एक ज़ख़्म है। लेकिन असली दर्द तो कहीं और है—यह शौक़ की उंगली है, यह जुनून है। यह बताता है कि प्यार का दर्द कभी-कभी बहुत ही नज़ाकत से, बहुत ही धीरे-धीरे, हमें सताता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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