चाहूँ तो भर के कौली उठा लूँ अभी तुम्हें — मीर तक़ी मीर

चाहूँ तो भर के कौली उठा लूँ अभी तुम्हें कैसे ही भारी हो मिरे आगे तो फूल हो

“If I wished, I could lift the whole pile of flowers now, but you are too light for me.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर मैं चाहूँ तो अभी तुम्हें कौली भरकर उठा सकता हूँ, पर तुम मेरे लिए बहुत हल्की हो।

विस्तार

यह शेर महबूब की उस नज़ाकत और कोमलता को बयान करता है, जिसे शायर ने महसूस किया है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि वो आपको उठा सकते हैं, क्योंकि आप उनके लिए किसी भी वज़न की मोहताज नहीं हैं। आप तो फूल की तरह हल्की हैं! यह इश्क़ की उस अवस्था को दर्शाता है, जहाँ महबूब इतना सहज और हल्का महसूस होता है कि उसे संभालना भी एक इनायत लगती है। बहुत ख़ूबसूरत तसव्वुर है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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