जलें हैं कब की मिज़्गाँ आँसुओं की गर्म-जोशी से
उस आब-ए-चश्म की जोशिश ने आतिश दी नीस्ताँ को
“Since when has the blush of my eyes been warmed by tears' heat, The fervor of those tear-filled eyes has ignited the night.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरी आँखों की लाली कब आँसुओं की गरमाहट से जल पाई, उस आँसू भरे नयन की जोश ने रात में आग लगा दी।
विस्तार
यह शेर दर्द और जुनून के रिश्ते को समझाता है। शायर पूछ रहे हैं कि मेरी पलकें कब जलेंगी, मेरे अपने आँसुओं की गर्मजोशी से! ये आँसू सिर्फ़ ग़म नहीं हैं, बल्कि एक जोश हैं, एक जुनून हैं। और यही जुनून, आतिश बनकर, दिल के कोने-कोने में आग लगा गया है। एक दर्द जो बहुत गहरा और बहुत खूबसूरत है।
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