हुआ हूँ गुंचा-ए-पज़मुर्दा आख़िर फ़स्ल का तुझ बिन न दे बरबाद हसरत कुश्ता-ए-सर-दर-गरेबाँ को

“Having become a bundle of the defeated at the end of the season without you, Do not give the struggle of the head (life) to a stranger.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुझ बिन आख़िर फ़स्ल का मैं गुंचा-ए-पज़मुर्दा हो गया हूँ, इसलिए मुझे यह हसरत न दे कि मैं अपना सिर (जीवन) किसी पराई जगह पर संघर्ष करूँ।

विस्तार

यह शेर बिछड़ने के दर्द और मोहब्बत की नाज़ुक हालत को बयां करता है। शायर कहते हैं कि आपके बिना, मैं उस मौसम के अंत की तरह मुरझाया हुआ फूल हूँ। लेकिन असली गुहार यह है कि मेरे इस दिल की जो हसरत है, जो कोशिशें मैंने की हैं, उन्हें कहीं बेगानेपन में बर्बाद मत होने देना। यह एक तरह की दया की भीख है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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