नहीं रेग-ए-रवाँ मजनूँ के दिल की बे-क़रारी ने
किया है मुज़्तरिब हर ज़रा-ए-गर्द-ए-बयाबाँ को
“Not the restlessness of Majnu's heart in the flowing desert, But the every speck of the barren wasteland has been made anxious.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मजनूँ के दिल की बेचैनी ने नहीं, बल्कि हर कण ने इस उजाड़ रेगिस्तान को बेचैन कर दिया है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ और दिल के दर्द की पराकाष्ठा को दिखाता है। शायर कहते हैं कि मजनू के दिल की बेचैनी इतनी गहरी है.... कि यह सिर्फ़ उसे नहीं, बल्कि पूरे बंजर रेगिस्तान को भी विचलित कर रही है। यानी, एक इंसान का दर्द इतना बड़ा होता है कि वह प्रकृति को भी हिला देता है। यह दर्द ही सबसे बड़ा वजूद बन जाता है।
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