ज़ि-बस सिर्फ़ जुनूँ मेरे हुआ आहन अजब मत कर न हो गर हल्क़ा-ए-दर ख़ाना-ए-ज़ंजीर-साज़ाँ को

“This longing, merely my passion, is strange; do not make it lighter, O artisan of the curtain and the chain.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

बस यह जुनूँ मेरा हुआ आहन अजब मत कर, न हो गर हल्क़ा-ए-दर ख़ाना-ए-ज़ंजीर-साज़ाँ को।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ मोहब्बत की बात नहीं करता, दोस्तों! यह ज़िंदगी की एक गहरी उलझन है। शायर कहते हैं कि मेरा जुनून अब बस एक धीमी सी आह है... इतना शांत कि शायद कोई नोटिस न करे। लेकिन असली बात तो दूसरी लाइन में है। वह पूछ रहे हैं कि क्या यह दुनिया, यह दरवाज़ा, असल में आज़ादी का रास्ता है? या यह भी तो किसी के बनाए ज़ंजीर-साज़ का बनाया हुआ पिंजरा है?

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