ग़ुरूर-ए-नाज़ से आँखें न खोलीं इस जफ़ा-जू ने
मिला पाँव तले जब तक न चश्म-ए-सद-ग़ज़ालाँ को
“From the pride of coquetry, these eyes did not open, until when they found the doe-eyed glance beneath the foot of cruelty.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
घमंड भरी अदा से आँखें नहीं खुलीं इस क्रूरता भरे युग ने, जब तक कि पाँव तले हिरनी जैसी निगाहों का झरना नहीं मिला।
विस्तार
यह शेर बताता है कि असली खूबसूरती कितनी शक्तिशाली होती है। शायर कहते हैं कि महबूब का नज़ाकत का घमंड (ग़ुरूर-ए-नाज़) उन्हें आँखें बंद रखता था.... लेकिन जब उन्हें अपने पाँव तले सौ-ग़ज़लओं की आँखें दिखाई दीं, तो वह घमंड टूट गया! यह शे'र उस सुंदरता का वर्णन करता है जो हर तरह के अहंकार को झुका देती है।
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