हर ज़र्रा ख़ाक तेरी गली की है बे-क़रार — मीर तक़ी मीर
हर ज़र्रा ख़ाक तेरी गली की है बे-क़रार
याँ कौन सा सितम-ज़दा माटी में रुल गया
“Every particle of dust in your alley is restless, Which cruel mischief has made the earth writhe?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारी गली का हर कण कीचड़ में बेचैन है, कौन सा क्रूर खेल है जिसने धरती को तड़पा दिया।
विस्तार
यह शेर बताता है कि विरह का दर्द कितना गहरा होता है। शायर कहते हैं कि महबूब की गली का हर कण, हर धूल का ज़रा, बेचैन है। ऐसा लगता है मानो यह दुःख इतना प्रचंड है कि इसने न सिर्फ़ इंसान को, बल्कि उस जगह को भी हिला दिया है। शायर पूछते हैं कि क्या कोई बहुत बड़ा, ग़म-ज़दा शख़्स यहाँ रोया है, जिसने इस पूरे माहौल को उदास कर दिया है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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