ख़तर राह-ए-वफ़ा बल्कि बहुत दूर खिंचा — मीर तक़ी मीर
ख़तर राह-ए-वफ़ा बल्कि बहुत दूर खिंचा
उम्र गुज़री कि बहम नामा-ओ-पैग़ाम नहीं
“The path of devotion was not dangerous, but stretched too far; I spent my life without any news or message.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
वफ़ा का रास्ता ख़तरनाक नहीं था, बल्कि बहुत दूर तक खिंच गया; मैंने अपनी ज़िंदगी बिना किसी खबर या संदेश के गुज़ार दी।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है जब वफ़ा का रास्ता इतना लंबा और कठिन हो जाए कि जीना मुश्किल हो जाए। शायर कहते हैं कि वफ़ा की राह सिर्फ़ ख़तरनाक नहीं, बल्कि बहुत खिंची हुई है। पूरी ज़िंदगी गुज़र गई, मगर न तो कोई ख़त मिला, न कोई पैग़ाम। ये इंतज़ार की एक ख़ामोश चीख़ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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