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शराब-ए-ख़ून बिन तड़पूँ से दिल लबरेज़ रहता है भरे हैं संग-रेज़े मैं नय इस मीना-ए-ख़ाली में

Without the wine of blood, my heart remains restless, In this newly empty vase, my companions are filled.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

खून की शराब के बिना, मेरा दिल बेचैन रहता है; इस नए खाली घड़े में मेरे साथी भरे हुए हैं।

विस्तार

यह शेर उस रूहानी नशे की बात करता है, जो सिर्फ़ मोहब्बत में होता है। शायर कहते हैं कि दिल तो तड़प (दर्द) की शराब के बिना भी मदहोश रहता है। और इस खाली ज़िंदगी के मीने में, उन्होंने दर्द की जगह, बस अपने साथियों की महफ़िल भर दी है। यह एहसास दिलाता है कि कभी-कभी साथ होना ही सबसे बड़ा सुकून होता है।

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