ख़िलाफ़ उन और ख़ूबाँ के सदा ये जी में रहता है
यही तो 'मीर' इक ख़ूबी है मा'शूक़-ए-ख़याली में
“Against those and the beauty, this always resides in the heart, This, indeed, 'Mir,' is a unique quality in the beloved of fancy.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
यह दिल में एक ऐसी आदत है जो उन लोगों और सुंदर चीज़ों के विपरीत भी बनी रहती है, 'मीर' के अनुसार, यह कल्पना के महबूब में एक अनोखी ख़ूबी है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहरी सच्चाई को बयान करता है, जहाँ यादें ही सबसे बड़ी साथी होती हैं। मीर कहते हैं कि महबूब की मौजूदगी, वो बसती है दिल में.... चाहे महबूब सामने न हो, या वो खूबसूरती समय के साथ फीकी पड़ जाए। असली ख़ूबसूरती तो उस 'काल्पनिक' महबूब में है, जिसे हम अपनी यादों में सजाते हैं। यह शायरी की अमर भावना है।
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