दाद ले छोड़ूँ मैं सय्याद से अपनी लेकिन — मीर तक़ी मीर

दाद ले छोड़ूँ मैं सय्याद से अपनी लेकिन ज़ोफ़ से मेरे तईं ताक़त-ए-फ़रयाद नहीं

“Though I leave my beloved with Sayyad, but From Zauf, I have no strength of lamentation.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हालांकि मैं अपनी प्रियतमा को सैयाद के पास छोड़ रही हूँ, लेकिन ज़ौफ़ से मुझे विलाप की कोई शक्ति नहीं है।

विस्तार

यह शेर दर्द की उस उलझन को बयां करता है जब दिल को एक ग़म से छुटकारा पाना है, लेकिन एक और ग़म का डर इतना गहरा है कि उसे ज़ुबान पर लाना भी मुमकिन नहीं। शायर कहते हैं कि वह एक स्रोत का दर्द छोड़ सकते हैं.... लेकिन दूसरे दर्द की ताक़त इतनी है कि उसे बयान करना भी नामुमकिन है। यह एहसास-ए-हाल बहुत ही गहरा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.