फिर जिएँगे जो तुझ सा है जाँ-बख़्श — मीर तक़ी मीर
“Though we will live again, we will not be able to live like you, O life-giver.”
अर्थ
फिर जिएँगे जो तुझ सा है जाँ-बख़्श, ऐसा जीना हमें ज़रूर नहीं। इसका शाब्दिक अर्थ है कि जो जाँ-बख़्श (जीवनदाता) तुझ सा है, हम वैसा जीवन जी नहीं पाएँगे।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत के उस गहरे दर्द को बयां करता है, जब जीवन और दर्द के बीच एक चुनाव करना पड़ता है। शायर अपने महबूब से कह रहे हैं कि अगर हमें दोबारा जीना भी पड़े, तो वह ज़िंदगी नहीं जो आपने दी है। यह एक तरह का इकरार-ए-दर्द है, कि ये दर्द इतना गहरा है कि इससे छुटकारा पाना भी ज़रूरी है। यह शायरी सिर्फ मोहब्बत नहीं, बल्कि जीने की हक़ीक़त पर एक सवाल है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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